तलवार की नोक पर पत्रकार - महेश दीक्षित

 मेरे लिए नेता या राजनीति नहीं, खबर सबसे पहले है।

धमकाते हैं लोग, दबाव भी बनाते हैं,
लेकिन एक पत्रकार हर दिन तलवार की नोक पर जीता है।

अभावों में रहकर भी वह समाज के लिए गंभीर खबरें लेकर आता है,
सत्ता से सवाल करता है, सच को सामने लाता है।
कभी तारीफ नहीं मिलती,
अक्सर ताने ही सुनने पड़ते हैं।

फिर भी पत्रकार रुकता नहीं,
क्योंकि उसका धर्म है सच दिखाना।
वह समाज का सिपाही है,
जो कलम को हथियार बनाकर हर अंधेरे से लड़ता है।

भीड़ में खामोश रहकर भी
वह जनता की आवाज बनता है।
कभी खतरे, कभी दबाव, कभी अपमान —
फिर भी सच की राह नहीं छोड़ता।

एक सच्चा पत्रकार जानता है कि
उसकी मेहनत का शोर नहीं होता,
लेकिन उसके लिखे शब्द
समाज की सोच बदलने की ताकत रखते हैं।

“पत्रकारिता केवल पेशा नहीं,
सच और समाज के प्रति जिम्मेदारी है।”


  • तलवार की नोक पर पत्रकार
  • सच का सिपाही
  • खबर सबसे पहले
  • कलम बनाम सत्ता
  • धमकियों के बीच सच
  • एक पत्रकार की लड़ाई
  • सच लिखने की सजा
  • तानों के बीच पत्रकार
  • अभावों का रिपोर्टर
  • कलम का योद्धा
  • हर दिन मौत के साये में
  • सिस्टम से टकराता पत्रकार
  • सच की कीमत
  • पत्रकार: डर के आगे सच
  • खबरों का सिपाही
  • तलवार, सच और पत्रकार
  • ग्राउंड रिपोर्टर
  • दबाव के खिलाफ कलम
  • सच का प्रहरी
  • हर खबर का योद्धा
  • Post a Comment

    0 Comments